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Sayari 2line me



                   SAYARI DO LINE ME



अजीब खेल है ये मोहब्बत का,
किसी को हम न मिले, कोई हमें ना मिला।

उसने देखा ही नहीं अपनी हथेली को कभी,
उसमे हलकी सी लकीर मेरी भी थी।

तमाम नींदें गिरवी हैं हमारी उसके पास,
जिससे ज़रा सी मुहब्बत की थी हमनें।

कितने सालों के इंतज़ार का सफर खाक हुआ,
उसने जब पूछा.. कहो कैसे आना हुआ।

हाथों की लकीरे पढ़ कर रो देता है दिल,
सब कुछ तो है मग़र तेरा नाम क्यूँ नहीं है।

इश्क अभी पेश ही हुआ था इंसाफ के कटघरे में,
सभी बोल उठे यही कातिल है.. यही कातिल है।

ना जाने वो कितनी नाराज़ है मुझसे..
ख्वाब में भी मिलती है तो.. बात नहीं करती।

जी करता है तेरे संग भीगू मोहब्बत की बरसात मे,
और रब करे.. उसके बाद तुझे इश्क़ का बुखार हो जाए।

उनका इल्ज़ाम लगाने का अंदाज ही कुछ गज़ब का था,
हमने खुद अपने ही ख़िलाफ गवाही दे दी।

ज़िंदगी में मोहबत का पौधा लगाने से पहले ज़मीन परख लेना,
हर एक मिटटी की फितरत में वफ़ा नहीं होती दोस्तो।


सुना है तुम्हारी एक निगाह से कत्ल होते हैं लोग..
एक नज़र हमको भी देख लो.. ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती..!!

वो इतना रोई मेरी मौत पर मुझे जगाने के लिए..
मैं मरता ही क्यूँ अगर वो थोडा रो देती मुझे पाने के लिए..!!

खुद भी रोता है, मुझे भी रुला के जाता है..
ये बारिश का मौसम, उसकी याद दिला के जाता हैं।

बड रहा है दर्द गम उस को भूला देने के बाद
याद उसकी ओर आई खत जला देने के बाद!

निगाहों से भी चोट लगती है.. जनाब..
जब कोई देख कर भी अन्देखा कर देता है..!!

वो दुआएं काश मैने दीवारों से मांगी होती,
ऐ खुदा.. सुना है कि उनके तो कान होते है!!

आईना आज फिर रिशवत लेता पकडा गया,
दिल में दर्द था ओर चेहरा हंसता हुआ पकडा गया

इश्क है या इबादत.. अब कुछ समझ नहीं आता,
एक खुबसूरत ख्याल हो तुम जो दिल से नहीं जाता.

लोगो ने कुछ दिया, तो सुनाया भी बहुत कुछ
ऐ खुदा.. एक तेरा ही दर है, जहा कभी ताना नहीं मिला!!

कहीं फिसल न जाऊं तेरे ख्यालों में चलते चलते,
अपनी यादों को रोको मेरे शहर में बारिश हो रही है !!


फ़िक्र तो तेरी आज भी है..
बस .. जिक्र का हक नही रहा।

तुमसे ऐसा भी क्या रिश्ता हे?
दर्द कोई भी हो.. याद तेरी ही आती हे।

काग़ज़ पे तो अदालत चलती है..
हमने तो तेरी आँखो के फैसले मंजूर किये।

एम्बुलेंस सा हो गया है ये जिस्म,
सारा दिन घायल दिल को लिये फिरता है।

हम तो बिछडे थे तुमको अपना अहसास दिलाने के लिए,
मगर तुमने तो मेरे बिना जीना ही सिख लिया।

ताला लगा दिया दिल को.. अब तेरे बिन किसी का अरमान नहीं..
बंद होकर फिर खुल जाए, ये कोई दुकान नहीं।

सिखा दिया दुनिया ने मुझे अपनो पर भी शक करना
मेरी फितरत में तो गैरों पर भी भरोसा करना था..!!

जो इस दुनियाँ में नहीं मिलते , वो फिर किस दुनियाँ में मिलेंगे जनाब..
बस यही सोचकर रब ने एक दुनियाँ बनायी , जिसे कहते हैं ख्वाब।

जुनून, हौसला, और पागलपन आज भी वही है
मैंने जीने का तरीका बदला है तेवर नहीं..!!

हम ने भी कह दिया उनसे की बहुत हो गयी जंग बस..
बस ए मोहब्बत तुझे फ़तेह मुबारक मेरी शिक्स्त हुई।


पहले रिम-झिम फिर बरसात और अचानक कडी धूप,
मोहब्बत ओर अगस्त की फितरत एक सी है..!!

किस मुँह से इल्ज़ाम लगाएं बारिश की बौछारों पर,
हमने ख़ुद तस्वीर बनाई थी मिट्टी की दीवारों पर !!

बारिश और महोबत दोनों ही यादगार होते हे,
बारिश में जिस्म भीगता हैं और महोबत मैं आँखे.


मुमकिन नहीं है हर रोज मोहब्बत के नए किस्से लिखना,
मेरे दोस्तों अब मेरे बिना अपनी महफ़िल सजाना सीख लो।

कल क्या खूब इश्क़ से मैने बदला लिया,
कागज़ पर लिखा इश्क़ और उसे ज़ला दिया..!!

ये ही एक फर्क है तेरे और मेरे शहर की बारिश में
तेरे यहाँ ‘जाम’ लगता है, मेरे यहाँ ‘जाम’ लगते हैं..!!

हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी,
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।

रुकी-रुकी सी लग रही है नब्ज-ए-हयात,
ये कौन उठ के गया है मेरे सिरहाने से।

आंसू निकल पडे ख्वाब मे उसको दूर जाते देखकर..!!
आँख खुली तो एहसास हुआ इश्क सोते हुए भी रुलाता है..!!

यू तो अल्फाज नही हैं आज मेरे पास मेहफिल में सुनाने को,
खैर कोई बात नही, जख्मों को ही कुरेद देता हूँ।

मेरी आँखों में मत ढूंढा करो खुद को
पता है ना.. दिल में रहते हो खुदा की तरह।

तुम्हारा क्या बिगाड़, था जो तुमने तोड़ डाला है!!
ये टुकडे मैं नही लूँगा मुझे तुम दिल बना कर दो!!!!

मुमकिन नहीं है हर रोज मोहब्बत के नए किस्से लिखना,
मेरे दोस्तों अब मेरे बिना अपनी महफ़िल सजाना सीख लो।


तुम दूर हो या पास फर्क किसे पड़ता है,
तू जँहा भी रहे तेरा दिल तो यँही रहता है..!!

पहली बारिश का नशा ही कुछ अलग होता हैं,
पलको को छूते ही सीधा दिल पे असर होता हैं।

सुनो ये बादल जब भी बरसता है,
मन तुझसे ही मिलने को तरसता है..!!

मरहम लगा सको तो गरीब के जख्मो पर लगा देना
हकीम बहुत है बाजार में अमीरो के इलाज खातिर !!

मैंने अपने ख्वाहिशो को दिवार में चुनवा दिया,
खामखाँ जिंदगी में अनारकली बनके नाच रही थी !!

वो कहते हैं हम जी लेंगे खुशी से तुम्हारे बिना,
हमें डर है वो टूटकर बिखर जायेंगे हमारे बिना।

ज़िन्दगी ये चाहती है कि ख़ुदकुशी कर लूँ,
मैं इस इन्तज़ार में हूँ कि कोई हादसा हो जाए।

मोहब्बत रोग है दिल का इसे दिल पे ही छोड़ दो,
दिमाग को अगर बचा लो तो भी गनीमत हो..!!

ख्वाब मत बना मुझे.. सच नहीं होते,
साया बना लो मुझे.. साथ नहीं छोडेंगे..!!

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक,
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक..!!


जिन्दगी की राहों में मुस्कराते रहो हमेशा,
उदास दिलों को हमदर्द तो मिलते हैं, हमसफ़र नहीं !!

ना प्यार कम हुआ है ना ही प्यार का अहेसास,
बस उसके बिना जिन्दगी काटने की आदत हो गई है !!

तेरी यादों ने मुझे क्या खूब मशरूफ किया है ऐ सनम..
खुद से मुलाकात के लिए भी वक़्त मुकर्रर करना पड़ता है।

तुम्हारी याद ऐसे महफूज़ है मेरे दिल मे,
जैसे किसी गरीब ने रकम रक्खी हो तिजोरी में.!!

इश्क़ है या कुछ और ये तो पता नहीं ,
पर जो तुमसे है वो किसी और से नही..!!

ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है
तो मेरा लहू लेले, यू कहानिया अधूरी न लिखा कर।

तेरी जगह आज भी कोई नहीं ले सकता ,
पता नहीं वजह तेरी खूबी है या मेरी कमी..!!

तुम्हारा साथ तसल्ली से चाहिए मुझे..
जन्मों की थकान लम्हों में कहाँ उतरती है !!

यूँ तो शिकायते आप से सैंकड़ों हैं मगर..
आप एक मुस्कान ही काफी है मनाने के लिये।

मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गया हूँ ऐ खुदा..
किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे, जो मौत तक वफा करे।


Naa karo takraar mujhe tumhara hi khiyal hai
Phir baat se baat nikley gi aur tum rooth jaaoge!

Main uske khyaal se niklu toh kese niklu
Woh meri soch ke har raste par aata hai!!

Bouht mushqil se seekha ha khush rehna..
Tumhare Bin, Ab suna ha ye bat bhi tumhy pareshan karti hai..

Sath chorne valo ko to ek bahana chaiye,
Varna nibhane vale to mout ke darwaze tak sath nahi chorte!

Ek bewafa ke naam kar di thi zindagi
Us bewafa ne ham se zindagi hi cheen li!!

Tere honae tak main kuch na tha..
Tera huaa to main barbaad huaa!

Koi zanjeer bhi nahi phir bhi qaid hoon tujh mein.
Nahi malum tha ke tjhe aisa hunar bhi aata hai.

Dilasa dete hein log, ke yun har waqt na roya karo…
Mein kaise bataon ke kuch dard sehne ke qabil nahi hote

Apni halat ka kuch ehsas nahin hai mujhko,
Maine auron se suna hai ki pareshan hun main.!!

Khatam hoti hui ek sham adhoori thi bahut..
Zindagi se ye mulaqat zaroori thi bahut!!


मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर..
मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हें याद करते करते..!!

सिलसिला ये चाहत का दोनो तरफ से था,
वो मेरी जान चाहती थी और मैं जान से ज्यादा उसे।

शायद कुछ दिन और लगेंगे, ज़ख़्मे-दिल के भरने में,
जो अक्सर याद आते थे वो कभी-कभी याद आते हैं।

अपने वजूद पर इतना न इतरा ए ज़िन्दगी..
वो तो मौत है जो तुझे मोहलत देती जा रही है!!

होता अगर मुमकिन, तुझे साँस बना कर रखते सीने में,
तू रुक जाये तो मैं नही, मैं मर जाऊँ तो तू नही.

आज तो हम खूब रुलायेंगे उन्हें,
सुना है उसे रोते हुए लिपट जाने की आदत है!

आज भी प्यारी है मुझे तेरी हर निशानी ..
फिर चाहे वो दिल का दर्द हो या आँखो का पानी।

उम्र छोटी है तो क्या, ज़िंदगी का हरेक मंज़र देखा है,
फरेबी मुस्कुराहटें देखी हैं, बगल में खंजर देखा।

मुश्किल नहीं है कुछ दुनिया में, तू जरा हिम्मत तो कर…
खवाब बदलेगें हकीकत में.. तू ज़रा कोशिश तो कर।

वफ़ा के वादे वो सारे भुला गयी चुप चाप,
वो मेरे दिल की दीवारें हिला गयी चुप चाप।


मैं नींद का शोकीन ज्यादा तो नही..
लेकिन तेरे ख्वाब ना देखूँ तो.. गुजारा नही होता..!!

मुहब्बत नहीं है नाम सिर्फ पा लेने का..
बिछड़ के भी अक्सर दिल धड़कते हैं साथ-साथ..!!

मुश्किल भी तुम हो, हल भी तुम हो ,
होती है जो सीने में , वो हलचल भी तुम हो ..!!

चेहरे के रंग को देखकर दोस्त ना बनाना.. दोस्तों ..
तन का काला तो चलेगा लेकिन मन का काला नहीं।

दामन को फैलाये बैठे हैं अलफ़ाज़-ए-दुआ कुछ याद नही
माँगू तो अब क्या माँगू जब तेरे सिवा कुछ याद नही

तुझे भूलने के लिए मुझे सिर्फ़ एक पल चाहिए,
वह पल! जिसे लोग अक्सर मौत कहते हैं…!!

अब लोग पूछते हैं हमसे.. तुम कुछ बदल गए हो
बताओ टूटे हुए पत्ते अब .. रंग भी न बदलें क्या..!!

छोटा है मुहब्बत लफ्ज, मगर तासीर इसकी प्यारी है.
इसे दिल से करोगे तुम, तो ये सारी दुनियाँ तुम्हारी है.

क्या क्या रंग दिखाती है जिंदगी क्या खूब इक्तेफ़ाक होता है,
प्यार में ऊम्र नहीँ होती पर हर ऊम्र में प्यार होता है..!!

तुम्हारी याद की शिद्दत में बहने वाला अश्क
ज़मीं में बो दिया जाए तो आँख उग आए..!!



बड़े शौक से बनाया तुमने मेरे दिल मे अपना घर
जब रहने की बारी आई तो तुमने ठिकाना बदल दिया।

इश्क का धंधा ही बंद कर दिया साहेब।
मुनाफे में जेब जले.. और घाटे में दिल..!

शायद कुछ दिन और लगेंगे, ज़ख़्मे-दिल के भरने में,
जो अक्सर याद आते थे वो कभी-कभी याद आते हैं।

अपने वजूद पर इतना न इतरा ए ज़िन्दगी..
वो तो मौत है जो तुझे मोहलत देती जा रही है!!

कुछ तो बात है तेरी फितरत में ऐ दोस्त,
वरना तुझ को याद करने की खता हम बार-बार न करते!

चुपचाप गुज़ार देगें तेरे बिना भी ये ज़िन्दगी,
लोगो को सिखा देगें मोहब्बत ऐसे भी होती है।

ग़ैरों को भला समझे और मुझ को बुरा जाना..
समझे भी तो क्या समझे जाना भी तो क्या जाना।

किनारों से मुझे ऐ नाख़ुदा दूर ही रखना..
वहाँ ले कर चलो, तूफ़ान जहां से उठने वाला हैं।

जब किसी से कोई गिला रखना सामने अपने आईना रखना।

आंखों देखी कहने वाले, पहले भी कम-कम ही थे
अब तो सब ही सुनी-सुनाई बातों को दोहराते हैं।


मंज़िलों से गुमराह भी कर देते हैं कुछ लोग
हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता.

दिल से पूछो तो आज भी तुम मेरे ही हो
ये ओर बात है कि किस्मत दग़ा कर गयी।

कौन कहता है मुसाफिर जख्मी नही होते
रास्ते गवाह हैं कम्बख्त गवाही नही देते।

अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो ।

इक रात चाँदनी मिरे बिस्तर पे आई थी
मैं ने तराश कर तिरा चेहरा बना दिया ।

न तो देर है, न अंधेर है .. रे मानव!
तेरे कर्मों का सब फेर है .. शुभ रात्रि।

सुख भोर के टिमटिमाते हुए तारे की तरह है
देखते ही देखते ये ख़त्म हो जाता है …!

जब भी अंधेरा गहराता है…
उजाला उसका समाधान बनकर आ जाता है…!

एक ही समानता है…पतंग औऱ जिन्दगी में
ऊँचाई में हो तब तक ही ‘वाह – वाह’ होती है ।

Kuch door tak to jaise koi mere sath tha
Phir… apne sath aap hi chalna paDa mujhe!


मैं कड़ी धुप में चलता हु इस यकींन के साथ,
मैं जलूँगा तो मेरे घर में उजाले होंगे.!!

इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई..
हम न सोए रात थक कर सो गई.

लफ़्ज़ों से बना इंसाँ लफ़्ज़ों ही में रहता है..
लफ़्ज़ों से सँवरता है लफ़्ज़ों से बिगड़ता है .

ज़िंदगी ज़ोर है रवानी का… क्या थमेगा बहाव पानी का.

रोती है आँख जलता है ये दिल जब..
अपने घर के फेंके दिये से आँगन पराया जगमगाता है.

क्या साथ लाए क्या छोड़ आए..
रस्ते में हम मंज़िल पे जा के ही याद आता है.

आदमी मुसाफ़िर है आता है जाता है..
आते-जाते रस्ते में यादें छोड़ जाता है.

कोई भी हो हर ख़्वाब तो अच्छा नही होता..
बहुत ज्यादा प्यार भी अच्छा नहीं होता है.

इन ग़म की गलियों में कब तक ये दर्द हमें तड़पाएगा..
इन रस्तों पे चलते-चलते हमदर्द कोई मिल जाएगा.

जो बात निकलती है दिल से कुछ उसका असर होता है..
कहने वाला तो रोता है सुनने वाला भी रोता है.


हर रिश्ते मे सिर्फ नूर बरसेगा..
शर्त बस इतनी है कि रिश्ते में शरारतें करो साजिशें नहीं।

मोहब्बत अब समझदार हो गयी है
हैसियत देख कर आगे बढ़ती है।

आराम से कट रही थी तो अच्छी थी जिंदगी
तू कहाँ इन आँखों की बातों में आ गयी।

हीरों की बस्ती में हमने कांच ही कांच बटोरे हैं
कितने लिखे फ़साने फिर भी सारे कागज़ कोरे है।

दिलों में खोट है ज़ुबां से प्यार करते हैं
बहुत से लोग दुनिया में यही व्यापार करते हैं।

सज़ा मिली है इसे, इसकी वफाओं के लिये!
दिल वो मुज़रिम है के, जिस पर कोई इल्ज़ाम नहीं!

मेरे मुन्सिफ को मगर, ये भी तो मंज़ूर न था!
दिल ने इन्साफ ही माँगा था, कुछ ईनाम नहीं!

खुशबु आ रही है कहीं से ताज़े गुलाब की
शायद खिड़की खुली रेह गई होगी उनके मकान की।

तेरी मोहब्बत की तलब थी इस लिए हाथ फैला दिए
वरना हमने तो कभी अपनी ज़िंदगी की दुआ भी नही माँगी।

बेगुनाह कोई नहीं, सबके राज़ होते हैं..
किसी के छुप जाते हैं, किसी के छप जाते हैं..।


आज धुन्ध बहुत है मेरे शहर में,
अपने दिखते नहीं और जो दिखते है वो अपने नहीं।

कहो तो थोड़ा वक्त भेज दूँ,
सुना है तुम्हें फुर्सत नहीं मुझसे मिलने की।

हम कुछ ना कह सके उनसे, इतने जज्बातों के बाद..
हम अजनबी के अजनबी ही रहे इतनी मुलाकातो के बाद।

जो लम्हा साथ हैं उसे जी भर के जी लेना
कम्बख्त ये जिंदगी भरोसे के काबिल नहीं है।

मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गया हूँ..
ऐ खुदा किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे जो मौत तक वफा करे

खामोश बैठें तो वो कहते हैं उदासी अच्छी नहीं..
ज़रा सा हँस लें तो मुस्कुराने की वजह पूछ लेते हैं।

गिरते हुए आँसुओं को कौन देखता है..
झूठी मुस्कान के दीवाने हैं सब यहाँ।

इंसान बुलबुला है पानी का जी रहे हैं कपडे बदल बदल कर..
एक दिन एक ‘कपडे’ में ले जायेंगे कंधे बदल बदल कर।

तमाम गिले-शिकवे भुला कर सोया करो यारो..
सुना है मौत किसी को मुलाक़ात का मौका नही देती।

एक रास्ता ये भी है मंजिलों को पाने का..
कि सीख लो तुम भी हुनर हाँ में हाँ मिलाने का।


क्या नाम दूँ मैं अपनी मोहब्बत को..
कि ये तेरा सिवा किसी और से होती ही नहीं..!! ‪

कौन कहता है संवरने से बढ़ती है खूबसूरती…
दिलों में चाहत हो तो चेहरे यूँ ही निखर आते है..!!

जिसको तलब हो हमारी, वो लगाये बोली,
सौदा बुरा नहीं… बस “हालात” बुरे है..!!

मैं भी खरीददार हूं मैं भी खरीदूंगा..
प्यार कहां बिकता है पता बताना यारों..!!

उन लोगों की उम्मीदों को कभी टूटने ना दे..!!
जिनकी आखरी उम्मीद सिर्फ आप ही है..!!

निकाल दिया उसने हमें अपनी ज़िन्दगी से भीगे कागज़ की तरह,
ना लिखने के काबिल छोड़ा, ना जलने के..!!

तेरी ज़िन्दगी में ना सही…
पर तारीख में तो आज भी 13 ही हूँ..!!

जरूरी नहीं की हर बात पर तुम मेरा कहा मानों,
दहलीज पर रख दी है चाहत, आगे तुम जानो..!!


Meri zindagi se khelna to sab ki aadat ban gayi hai,
Kash hum khilona ban ke bikte to Aaj kisi ek ke to ho hi jate…

Kash tum humare hote saas hi ruk jati,
Agar ye lafz tumhre hote.

Mohabbat hamari bhi asar rakhti hai,
Buhat yaad aayege zara bhool kar to dekho..!!!

Baad Marne Ke Bhi Usne Chhora Na Dil Jalana..
Roz Phaink jata Hai Phool Sath wali Qabar Par,

Nahin karenge aaj k bad kabhi mannte tumhri,
Khuda jab raazi hoga tab tum to kya har cheez meri hogi..

Kal ki Raat Ka Aalam Is Kadar Tha Yaaro,
Uski Yado Ne Meri Ankho Ko Sone Na Diya..

Teri Judai Ke Shikwey Mai Kis Se Karoon!!
Yaha Her Koi Ab Bhi Tujhe Mera Samjhta Hai!!

Aaj phir zindagi ne ek naya Sabaq diya,
Aaj phir Apno ne mujhe gair kar diya.


तुम दूर..बहुत दूर हो मुझसे.. ये तो जानता हूँ मैं…
पर तुमसे करीब मेरे कोई नही है.. बस ये बात तुम याद रखना…

तुझे पाना.. तुझे खोना.. तेरी ही याद मेँ रोना
ये अगर इश्क है.. तो हम तनहा ही अच्छेँ हैँ.!!

कभी किसी के जज्बातों का मजाक ना बनाना.
ना जाने कौन सा दर्द लेकर कोई जी रहा होगा..

कुछ तो है जो बदल गया जिन्दगी में मेरी
अब आइने में चेहरा मेरा हँसता हुआ नज़र नहीं आता…

उमर बीत गई पर एक जरा सी बात समझ में नहीं आई
हो जाए जिनसे महोब्बत, वो लोग कदर क्यूं नहीं करते

यूँ तो कोई शिकायत नहीं मुझे मेरे आज से,
मगर कभी-कभी बीता हुआ कल बहुत याद आता है…

अपने हर लफ्ज़ में कहर रखते हैं हम,
रहें खामोश फिर भी असर रखते हैं हम..

बडी अजीब मुलाकातें होती थी हमारी,
वो किसी मतलब से मिलते थे और हमे तो सिर्फ मिलने से मतलब था…

अब ये न पूछना की . . ये अल्फ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ
कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के, कुछ अपना हाल सुनाता हूँ

तूफान भी आना जरुरी है जिंदगी में तब जा कर पता चलता है की
कौन हाथ छुड़ा कर भागता है और कौन हाथ पकड़ कर


तेरी गली में आकर के खो गये हैं दोंनो.!
मैं दिल को ढ़ूँढ़ता हुँ दिल तुमको ढ़ूँढ़ता है.!!

Humari ‪shayari‬ padh kar bas itna sa bole wo,
‪kalam‬ cheen lo inse.. ye ‪lafz‬ ‪dil‬ cheer dete hai.

तुम आए थे, पता लगा, सुन कर अच्छा भी लगा,
पर गैरों से पता चला, बेहद बुरा लगा !!

Aaj Koi ‪#‎Shayari‬ Nhi Bas Itna Sun Lo,
Main ‪‎Tanha‬ hun Aur ‪Wajah‬ Tum Ho

Jee Chahe Ki Duniya Ki Har Ek ‪#‎Fikra‬ Bhula Kar..!!
Kuchh ‪shayari‬ Sunau Me Tujhe Pass Bitha Kar..!!

Ab woh armaan hain, na woh sapnay..
Sab qabootar urra gaya koi!

औक़ात नही थी जमाने में जो मेरी कीमत लगा सके,
कबख़्त इश्क में क्या गिरे, मुफ़्त में नीलाम हो गए..

अकसर भुल जाती हूँ मैं तुम्हें शाम की चाय में चीनी की तरह,
फिर जिंदगी का फीकापन तुम्हारी कमी का एहसास दिला देता है !!

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना,
जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी

तेरी जरूरत, तेरा इंतजार और ये तन्हा आलम,
थक कर मुस्कुरा देती हूँ, मैं जब रो नहीं पाती !!

सीने में धङकता जो हिस्सा है,
उसी का तो ये सारा किस्सा है !


Nikle hum duniya ki bhid mein to pata chala,
Har wo shakhs tanha hai jisne pyar kiya.

Hum Ne Liya Sirf Honton Se Jo Naam Tumhara,
Dil Honton Se Ulajh Para K Yeh Sirf Mera Hai.

Na jane kyu yeh raat udaas kar deti hai har roz,
Mehsos yu hota hai jaise bichad raha ho koi Dheere Dheere.

Kaisa ajeeb rishta hai dil ka,
Dil aaj bhi dhoke mein hai or dhokebaaz aaj bhi dil mein.

Use kehna apni kismat pe naaz karna acha nahi hota,
Hum ne barish me bhi jalte huye ghar dekha hain.

Humse khelti rahi duniya taash ke patton ki tarah,
Jisne jeeta usne bhi phenka Jisne haara usne bhi phenka.

Karo Bade Shoq Se Mohabbat Ae Chahane Walo,
Magar Soch Lena Kisi Kaam K Na Raho Ge Bicharne K Baad.

Mujhe Khud Par Itna To Yaqeen Hai,
Koi Mujhe Chor To Sakta Hai Magar Bhula Nahi Sakta.

Jis phool ki parvarish hum ne apni mohabbat se ki,
Jab wo khushbu ke qabil hua to auro k liye mehkne laga.


 तेरे एहसासों में जो सुकून है..
वो नींद में कहाँ ..

अजीब किस्सा है जिन्दगी का,
अजनबी हाल पूछ रहे हैं और अपनो को खबर तक नहीं..

ये जो हालात हैं एक रोज सुधर जायेंगे..
पर कई लोग मेरे दिल से उतर जायेंगे..

मुजे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान है बहुत लोग..
‪‎पर‬ किसी ने मेरे पैरो के छाले नहीं देखे..

मिठास रिश्तों कि बढाए तो कोई बात बने..
मिठाईयाँ तो हर साल मीठी ही बनती है..

अपनी जिंदगी अजीब रंग में गुजरी है..
राज किया दिलों पे और तरसे मोहब्बत को..

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरुखी तेरी,
फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी !

वहम से भी अक्सर खत्म हो जाते हैं कुछ रिश्ते..
कसूर हर बार गल्तियों का नही होता..

किसकी खातिर अब तु धड़कता है ऐ दिल..
अब तो कर आराम, कहानी खत्म हुई !


सुना था.. मोहब्बत मिलती है, मोहब्बत के बदले |
हमारी बारी आई तो, रिवाज हि बदल गया ||

सुनो! या तो मिल जाओ, या बिछड जाओ,
यू सासो मे रह कर बेबस ना करो|

तुझ से रूठने का हक है मुझ को..
पर मुझ से तुम रूठो यह अच्छा नहीं लगता|

हजारों चेहरों में एक तुम ही पर मर मिटे थे..
वरना.. ना चाहतों की कमी थी और ना चाहने वालों की..!

एक सफ़र ऐसा भी होता है दोस्तों,
जिसमें पैर नहीं दिल थक जाता है…!!

तुझको लेकर मेरा ‪ख्याल‬ नहीं ‪बदलेगा‬..
‪साल‬ बदलेगा, मगर ‪दिल‬ का ‪हाल‬ नहीं बदलेगा|

अगर लोग यूँ ही कमिया निकालते रहे तो,
एक दिन सिर्फ खुबिया ही रह जायेगी मुझमे !

उसने चुपके से मेरी आँखों पर हाथ रखकर पूछा…बताओ कौन ???
मैं मुस्कराकर धीरे से बोला… “मेरी जिन्दगी”

मै नासमझ ही सहीं मगर वो तारा हूं..
जो तेरी एक ख्वाहिश के लिये..सौ बार टूट जाऊं|

मैं ख़ामोशी तेरे मन की, तू अनकहा अलफ़ाज़ मेरा..
मैं एक उलझा लम्हा, तू रूठा हुआ हालात मेरा |

जागना भी कबूल हैं तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ |


एक सिगरेट सी मिली तू मुझे..
ए आशिकी कश एक पल का लगाया था लत उम्र भर की लग गयी।

जी करता है चला जाऊं, हसीनों की महफिल में..
पर क्या करूं ये मेरे दोस्तो, उतना दम ही नहीं है दिल में।।

एक तु मिल जाती तो किसी का कया चला जाता..
तुझे उमर भर के लिए खुशीयाँ ही खुशीयाँ और मुझको मेरा खुदा मिल जाता।

बहुत थे मेरे भी इस दुनिया मेँ अपने,
फिर हुआ इश्क और हम लावारिस हो गए..!

मुझ पर सितम करो तो तरस मत खाना..
क्योकि खता मेरी हैं मोहब्बत मैंने किया हैं।

वो तो अपनी एक आदत को भी ना बदल सका..
जाने क्यूँ मैंने उसके लिए अपनी जिंदगी बदल डाली

बेवफा कहने से पहले मेरी रग रग का खून निचोड़ लेना..
कतरे कतरे से वफ़ा ना मिले तो बेशक मुझे छोड़ देना।

दो ‪‎लव्ज‬ क्या लिखे तेरी ‪याद‬ मे..
लोग कहने लगे तु आशिक‬ बहुत पुराना है।

सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से..
या तो दोनों आते हैं, या कोई नहीं आता..

कमाल का जिगर रखते है कुछ लोग,
दर्द पढ़ते है और आह तक नहीं करते।


तेरा नजरिया मेरे नजरिये से अलग था…
शायद तूने वक्त गुजारना था और हमे सारी जिन्दगी..

वाह रे इश्क़ तेरी मासूमियत का जवाव नहीं.।।
हँसा हँसा कर करता है बर्बाद तू मासूम लोगो को.।।

Mera majhab to, ye do hatheliya batati hai
jude to pooja… khule to dua kehlati hai

ना मैं शायर हूँ ना मेरा शायरी से कोई वास्ता,
बस शौक बन गया है, तेरी यादो को बयान करना

फरिश्ते आकर उनके जिस्म पर खुशबू लगाते थे !
वो बच्चे रेल के डिब्बों में अब झाडू लगाते हैं !!

जिन्हें पता है कि अकेलापन क्या होता है, वो लोग
दूसरों के लिए हमेशा हाजिर रहते हैं..!!

तमन्नाओ की महफ़िल तो हर कोई सजाता है,
पूरी उसकी होती है जो तकदीर लेकर आता है..!!

रूठा अगर तुझसे तो इस अंदाज से रूठूंगा ,
तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे बजूद को तरसेगी

हम लाए हैं तूफान से किश्ती निकाल के,
इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के

जिम्मेदारियां बांध देती हैं अपना शहर न छोड़नेको..
वरना कौन तरक्की की सीढीयां चढ़ना नहीं चाहता..


मेरे साथ बैठ कर वक़्त भी रोया
एक दिन बोला बन्दा तू ठीक है मैं ही ख़राब चल रहा हूँ .

उम्र बीत गयी पर एक जरा सी बात समझ नही आई..!!
हो जाये जिन से मोहब्बत वो लोग कदर क्यों नही करते..!!

उम्र बीत गयी पर एक जरा सी बात समझ नही आई..!!
हो जाये जिन से मोहब्बत वो लोग कदर क्यों नही करते..!

मुझे तो आज पता चला कि मैं किस क़दर तनहा हूँ
पीछे जब भी मुड़ कर देखूं तो मेरा साया भी मुँह फेर लेता है…!

जब जिन्दा थे तो बेबुनियाद आरोप लगाती रही,
जब कब्र में सोये तो ‘शख्स बडा लाजबाब था’

आज मैंने दिल को थोड़ा साफ़ किया,
कुछ को भूला दिया, कुछ को माफ़ किया!!

मुझे हराकर कोई मेरी जान भी ले जाए मुझे मंजुर है..!! .
लेकिन धोखा देने वालों को मै दुबारा मौका नही देता..!

इश्क की चोट का कुछ दिल पे असर हो तो सही,
दर्द कम हो कि ज्यादा हो, मगर हो तो सही…।

मोहब्बत की आजतक बस दो ही बातें अधूरी रही,
इक मै तुझे बता नही पाया, और दूसरी तूम समझ नही पाये..

बड़े अजीब से हो गए रिश्ते आजकल..
सब फुरसत में हैं पर वक़्त किसी के पास नही.


रोने की वजह न थी हसने का बहाना न था
क्यो हो गए हम इतने बडे इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था!

किसी ने कहा था महोब्बत फूल जैसी है!!
कदम रुक गये आज जब फूलों को बाजार में बिकते देखा!

जो दिल को अच्छा लगता है उसी को दोस्त कहता हूँ,
मुनाफ़ा देखकर रिश्तों की सियासत नहीं करता ।।।

ना कर तू इतनी कोशिशे, मेरे दर्द को समझने की….
तू पहले इश्क़ कर, फिर चोट खा, फिर लिख दवा मेरे दर्द की….

जिस घाव से खून नहीं निकलता,
समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है.

तुम रख न सकोगे, मेरा तोहफा संभालकर,
वरना मैं अभी दे दूँ, जिस्म से रूह निकालकर…!

अपने वजूद पर इतना न इतरा … ए ज़िन्दगी.
वो तो मौत है जो तुझे मोहलत देती जा रही है ।

वही हुआ न तेरा दिल, भर गया मुझसे…
कहा था न ये मोहब्बत नहीं हैं, जो तुम करती हो…!!

क्या कशिश थी उस की आँखों में.. मत पूछो.
मुझ से मेरा दिल लड़ पड़ा मुझे यही चाहिये…??

प्यार मोहब्बत चाहत इश्क़ जिन्दगी उल्फ़त ,
एक तेरे आने से कितना बदल गई किस्मत।


दिसम्बर क्या आया, रह गये दोनो अकेले
एक मै दुसरा वो कैलेण्डर का पेज आखरी

सपने तो बहुत आये पर, तुमसा कोई सपनों मे न आया।
फिजा मे फूल तो बहुत खिले पर, तुमसा फूल न मुसकुराया ॥

मन्जिले मुझे छोड़ गयी रास्तों ने सभाल लिया है..!!
जा जिन्दगी तेरी जरूरत नहीं मुझे हादसों ने पाल लिया है.

भूल कर भी अपने दिल की बात किसी से मत कहना,
यहाँ कागज भी जरा सी देर में अखबार बन जाता है!

चुभता तो बहुत कुछ मुझको भी है तीर की तरह..
मगर खामोश रहता हूँ, अपनी तकदीर की तरह..

ताकत की जरूरत तब होतीं हैं जब कुछ बुरा करना हों ..
वरना दुनियाँ में सब कुछ पाने के लिए प्यार ही काफ़ी हैं …!!

चाहो तो छोड़ दो.. चाहो तो निभा लो..
मोहब्बत तो हमारी है.. पर मर्जी सिर्फ तुम्हारी है..!!!

हम तो पागल है जो शायरी में ही दिल की बात कह देते है..
लोग तो गीता पे हाथ रखके भी सच नहीं बोलते !!

ना किया कर अपने दर्द को शायरी में ब्यान ये नादान दिल,
कुछ लोग टुट जाते हैं इसे अपनी दास्तान समझकर…

तेरी यादो को पसन्द आ गई है मेरी आँखों की नमी,
हँसना भी चाहूँ तो रूला देती है तेरी कमी…!!


दोस्तो से अच्छे तो मेरे दुश्मन निकले,,
कमबख्त हर बात पर कहते हैं कि तुझे छोडेंगे नहीं.

वहीँ तारीख वहीँ दिन वहीँ समा बस वो लोग नहीं जिन्होंने बना दिया यादगार हर लम्हा.

जींदगी गुझर गई सारी कांटो की कगार पर,
और फुलो ने मचाई है भीड़ हमारी मझार पर!!

सुनो तुम मेरी जिद नहीं जो पूरी हो…
तुम मेरी धड़कन हो जो जरुरी हो..

और कितने इम्तेहान लेगा वक़्त तू
ज़िन्दगी मेरी है फिर मर्ज़ी तेरी क्यों

यकीन नहीं होता फिर भी कर ही लेता हूँ…
जहाँ इतने हुए एक और फरेब हो जाने दो…

जो लम्हा साथ हैं, उसे जी भर के जी लेना.
कम्बख्त ये जिंदगी.. भरोसे के काबिल नहीं है.!

तुम भी अच्छे … तुम्हारी वफ़ा भी अच्छी,
बुरे तो हम है जिनका दिल नहीं लगता तुम्हारे बिना…

सुनो! बार बार मेरी ‪‎प्रोफाइल‬ खोल के ‪#तस्वीर‬ ना देखा करो…
नज़र ‪‎मोहब्बत‬ की होगी तो नज़र लग जाऐगी !!‪

मुस्कुरा देता हूँ अक्सर देखकर पुराने खत तेरे,,,
तू झूठ भी कितनी सच्चाई से लिखती थी..


एक उमर बीत चली है तुझे चाहते हुए,
तू आज भी बेखबर है कल की तरह..

जब नफ़रत करते करते थक जाओ..।
तो एक मौका प्यार को भी दे देना।।

खामोशियाँ – बहुत कुछ कहती हैं,
कान नही दिल लगा कर सुनना पड़ता है..

मैंने उसे बोला ये आसमान कितना बड़ा है ना,
पगली ने गले लगाया और कहा इससे बड़ा तो नहीं..

देखते हैं अब क्या मुकाम आता है साहेब,
सूखे पत्ते को इश्क़ हुआ है बहती हवा से..!!

मैने जो पुछा उनसे कि.. यूँ बात बात पे रूलाते क्युँ हो..
वो बङे प्यार से बोली, मुझे बहता हुआ पानी बेहद पंसद है.

शायरी लिखना बंद कर दूंगा अब मैं यारो..
मेरी शायरी की वजह से दोस्तों की आँखों में आंसू अब देखे नहीं जाते..!!

जाते जाते उसने पलटकर सिर्फ इतना कहा मुझसे,
मेरी बेवफायी से ही मर जाओगे या मार के जाऊ!!

ठहर सके जो.. लबों पे हमारे,
हँसी के सिवा, है मजाल किसकी.

तुम पल भर के लिए दूर क्या जाते हो,
तो हम ‘बिखरने’ से लगते हैं..


मोहब्बत भी ठंड जैसी है,
लग जाये तो बीमार कर देती है..

जादू वो लफ़्ज़ लफ़्ज़ से करता चला गया
और हमने बात बात में हर बात मान ली

हम बने ही थे तबाह होने के लिए..
तेरा छोड़ जाना तो महज़ इक बहाना था.!!

खेल ताश का हो या जिंदगी का,
अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो ।

मुझे क़बूल है.. हर दर्द.. हर तकलीफ़ तेरी चाहत में..
सिर्फ़ इतना बता दो.. क्या तुम्हें मेरी मोहब्बत क़बूल है..?

दुनिया खरीद लेगी हर मोड़ पर तुझे…
तूने जमीर बेचकर अच्छा नहीं किया..

मैं खुद भी अपने लिए अजनबी हूं ..
मुझे गैर कहने वाले.. तेरी बात मे दम है.

कभी आपको याद आई कभी हमने याद किया..
खैर छोड़ो ये बेकार सियासत चलो आओ बात करें

ज़िन्दगी में कई ऐसे लोग भी मिलते हैं
जिन्हें हम पा नहीं सकते सिर्फ चाह सकते हैं..

सच के रास्ते पे चलने का.. ये फ़ायदा हुआ,
रास्ते में कहीं भीड़ नहीं थी ।



खटखटाए न कोई दरवाजा, बाद मुद्दत मैं खुद में आया हूँ…
एक ही शख़्स मेरा अपना है, मैं उसी शख़्स से पराया हूँ|

देखी जो नब्ज मेरी, हँस कर बोला वो हकीम,
जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ तेरे हर मर्ज की दवा वही है |

ऐ दिल चल छोड अब ये पहरे,
ये दुनिया है झूठी यहाँ लोग हैं लुटेरे|

हुस्न वालों को क्या जरूरत है संवरने की,
वो तो सादगी में भी क़यामत की अदा रखते हैं|

तूने ही लगा दिया इलज़ाम-ए-बेवफाई,
मेरे पास तो चश्मदीद गवाह भी तु ही थी|

काश तेरा घर मेरे घर के बराबर होता,
तू न आती तेरी आवाज तो आती रहती|

कभी जो मुझे हक मिला अपनी तकदीर लिखने का…..
कसम खुदा की तेरा नाम लिखुंगी और कलम तोड दुंगी…..

मौजूद थी अभी उदासी रात की,
बहला ही था दिल ज़रा सा के फ़िर भोर आ गयी|

ख्वाहिश-ए-ज़िंदगी बस इतनी सी है अब मेरी,
कि साथ तेरा हो और ज़िंदगी कभी खत्म न हो।

करम ही करना है तुझको तो ये करम कर दे….
मेरे खुदा तू मेरी ख्वाहिशों को कम कर दे।


गरीब का दर्द
सुला दिया माँ ने…ये कहकर..!
परियां आएंगी सपनों में रोटियां लेकर..!!

तुम बदले तो मज़बूरिया थी
हम बदले तो बेवफा हो गए !!

अजब मुकाम पे ठहरा हुआ है काफिला जिंदगी का,
सुकून ढूढनें चले थे, नींद ही गवा बैठे”..!!

तेरी याद से शुरू होती है मेरी हर सुबह,
फिर ये कैसे कह दूँ.. कि मेरा दिन खराब है..!!

बंद कर दिए है हमने दरवाज़ें “इश्क” के…
पर तेरी याद हे की “दरारों” मे से भी आ जाती हैं

जिंदगी सफ़र पर निकल चुकी है…
मंजिल कब मिलेगी तू ही बता ये मेरे खुदा..!!

जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना,
बहुत तङपाते हैँ अक्सर सीने से लगाने वाले

बहुत कुछ खरीदकर भी..बहुत कुछ बचा लेता था..!
आज के जमाने से तो, वो बचपन का जमाना अच्छा था..!!

बड़े शौक से बनाया तुमने मेरे दिल मे अपना घर….
जब रहने की बारी आई तो तुमने ठिकाना बदल दिया|

जिंदगी के पन्ने कोरे ही अच्छे थे..
तूने सपनों की स्याही बिखेर कर दाग दाग कर दिया|


Jab tak bika na tha to koi poochta na tha,
Tune mujhe khareed ke anmol kar diya..

Main toh bik jaun tere naam pe maut ki tarah,
Tu kabhi kharidar to ban, is zingadi ke bazaar mein..

Suna hai aaj bik raha hai ishq baazaar mein,
koi unse pooche kya wafa bhi saath dete ho..

Hum ne tere baad na rakhi kisi se mohabbat ki aas;
Ek shakhs hi bahut tha, jo sub kuch sikha gaya.

Woh khud par garoor karte hai, to isme hairat ki koi baat nahi.
Jinhe hum chahte hai, woh aam ho hi nahi sakte.

Hum bhi bikne gaye the bazaar-e-ishq mein,
Kya pata tha wafa karne walon ko log khareeda nahi karte.

Tamam umr usi ke khayal mein guzar gayi,
Jise umr bhar mera khayal na aaya..

Koi batayega kaise dafnate hain unko,
Woh khwab jo dil mein hi mar jate hain..

Usne kaha tha aankhen bhar ke dekha kar mujhe,
Yaaron ab aankhen to bhar aati hai par vo nahi dekhte..

Main bhi kabhi hasta khelta tha
kal ek purani tasveer mein dekha tha khud ko..

Odh kar mitti ki chadar benishan ho jayenge,,
Ek din aayega hum bhi dastaan ho jayenge..

Raat shama bujha ke bahut der tak mehfil sajai humne,
Main apne dil ke liye rota raha aur yeh dil tere liye..

Seekh jao waqt par kisiki chahat ki qadar karna,
Kahin koi thak na jaye tumhein ehsaas dilate dilate..

Na tha koi hamara na ham kisi ke hain,
Bus ek Khuda hai aur hum usi ke hain..

Shohrat to janaze ke din pata chalegi,
Daulat to koi bhi kama leta hai..


बस तुम्हेँ पाने की तमन्ना नहीँ रही..
मोहब्बत तो आज भी तुमसे बेशुमार करतेँ हैँ.!!

इन्सान सब कुछ कॉपी कर सकता हैं,,,
लेकिन किस्मत और नसीब नही.. 

कभी रजामंदी, तो कभी बगावत है इश्क..
मोहब्बत राधा की है, तो मीरा की इबादत है इश्क..!! ?

नहीं मांगता ऐ खुदा कि,जिंदगी सौ साल की दे..
दे भले चंद लम्हों की, लेकिन कमाल की दे..!!! ?

कोई ? माल में खुश है कोई सिर्फ ? दाल में खुश है
खुशनसीब है वो लोग.. जो हर हाल में  खुश है..!! ?

किताबें भी बिल्कुल मेरी तरह हैं
अल्फ़ाज़ से भरपूर मगर ख़ामोश..!!


अजीब सी बस्ती में ठिकाना है मेरा
जहाँ लोग मिलते कम झांकते ज़्यादा है

बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना,
कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में !

किसी को क्या बताये की कितने मजबूर है हम..
चाहा था सिर्फ एक तुमको और अब तुम से ही दूर है हम।

वहां तक तो साथ चलो जहाँ तक साथ मुमकिन है,
जहाँ हालात बदलेंगे वहां तुम भी बदल जाना.

हम ना बदलेंगे वक्त की रफ़्तार के साथ, हम जब भी मिलेंगे अंदाज पुराना होगा !!
नजर चाहती है दीदार करना दिल चाहता है प्यार करना

क्या बताऊँ इस दिल का आलम नसीब में लिखा है इंतज़ार करना

अधूरी मोहब्बत मिली तो नींदें भी रूठ गयी…!
गुमनाम ज़िन्दगी थी तो कितने सकून से सोया करते थे…!!

अरे कितना झुठ बोलते हो तुम
खुश हो और कह रहे हो मोहब्बत भी की है

सुनो… तुम ही रख लो अपना बना कर..
औरों ने तो छोड़ दिया तुम्हारा समझकर..!!

कागज़ों पे लिख कर ज़ाया कर दूं मै वो शख़्स नही
वो शायर हुँ जिसे दिलों पे लिखने का हुनर आता है

झूठ बोलने का रियाज़ करता हूँ सुबह और शाम मैं
सच बोलने की अदा ने हमसे कई अजीज़ यार छीन लिये|


निकली थी बिना नकाब आज वो घर से
मौसम का दिल मचला लोगोँ ने भूकम्प कह दिया

अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत की इन्तहा
तो हम तुमसे नही तुम हमसे मोहब्बत करते

अमीरों के लिए बेशक तमाशा है ये जलजला,
गरीब के सर पे तो आसमान टुटा होगा.

नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा. . . .
बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है. .

कुछ इसलिये भी ख्वाइशो को मार देता हूँ
माँ कहती है घर की जिम्मेदारी है तुझ पर

नफरत ना करना पगली हमे बुरा लगेगा. . . .
बस प्यार से कह देना अब तेरी जरुरत नही है. .

जो मेरे बुरे वक्त में मेरे साथ है
मे उन्हें वादा करती हूँ मेरा अच्छा वक्त सिर्फ उनके लिए होगा

ये जो छोटे होते है ना दुकानों पर होटलों पर और वर्कशॉप पर
दरअसल ये बच्चे अपने घर के बड़े होते है

कुछ लोग आए थे मेरा दुख बाँटने
मैं जब खुश हुआ तो खफा होकर चल दिये

मोत से तो दुनिया मरती हैं
आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं

दिल टूटने पर भी जो शख्स आपसे शिकायत तक न कर सके…
उस शख्स से ज्यादा मोहब्बत आपको कोई और नही कर सकता


बिक रहे हैं ताज महल सड़क-चौराहों पर आज भी..
मोहब्बत साबित करने के लिए बादशाह होना जरुरी नहीं..!!

डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो,
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमें ही उतारा गया।

Tere na hone se kuchh bhi nahi badla,.
Bus kal jaha Dil hota tha, Aaj waha dard hota hai..!!

Masla ye nahi k tera hu
Masla ye hai k sirf tera hu..!!

गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुजारें हैं कितने
भला कैसे कह दूं कि माँ अनपढ़ है मेरी..!!

धोखा देती है अक्सर मासूम चेहरे की चमक।।
क्योंकि हर पत्थर हीरा नहीं होता।।

लोग ढूँढेंगे हमें भी, हाँ मगर सदियों के बाद।

अजीब खेल है इस मोहब्बत का,
किसी को हम न मिले और न कोई हमे मिला।

वो अपनी मर्जी से बात करते हैँ और
हम कितने पागल हैँ जो उनकी मर्जी का इंतजार करते हैं..!!!

सुना है आज उनकी आँखों आँशु आ गए।
वो बच्चों को लिखना सिखा रही थी.. कि मोहब्बत ऐसे लिखते है।

अजीब रंगो में गुजरी है मेरी जिंदगी।
दिलों पर राज़ किया पर मोहब्बत को तरस गए।


Mere saamne kar diye meri tasveer k Tukde-Tukde..
Pata chala mere peechhe wo unhe jod kar bahut Roye..!

उन्होंने वक़्त समझकर गुज़ार दिया हमको..
और हम.. उनको ज़िन्दगी समझकर आज भी जी रहे हैं..!!

Ae Neend Aaja Ke Ab Koi Nahi Hai Paas Mere.!
Ke Jis Ke Liye Tujhe Chora Tha Woh To Kab Kii So Gaye

Aye Dil! Qasam Se Koi Nahi, Koi Nahi, Koi Nahi,
Yaqeen maano Darwaza Faqat Hawa Se Khula

Kismat Buri Ya Main Bura Yahi Faisla Na Ho Saka
Main Har Kisi Ka ho gaya Bas Koi Mera Na Ho Saka..

Meri Hesiat ka Andaza Tum Ye Jan Ker Laga Lo Ge
Hum Un Ke Kabhi Nahi Hote, Jo Her Kisi Ke Ho Jaye

Wo mera tha, na mera hai, kabhi hoga nahi..
Dimag hai ye kehta.. Dil maanta nahi..

Teri muskurahat, tere kah-kahe kisi aor ke the,
Jo teri ankho se tha tapka, wo main tha..

Ab dekhiye to, kis ki jaan jaati hai,
Maine us ki, us ne meri qasam khayi hai!!!

Aye zindgi tu sach me bhot khubsurat hai
Phir bhi uske bina tu achhi nahi lagti..!!

Woh Kab Ka BhooL Chuka Ho Ga Hamari WaFa Ka Qissa..!!!
Bichar Kar,Kisi Se, Kisi Ko, Kisi Ka, Khayal Kab Rehta Hai..!

कभी टूटा नहीं दिल से तेरी याद का रिश्ता,
गुफ्तगू हो न हो ख्याल तेरा ही रहता है..


Aayega waqt to dikhayenge unko apny zakham..
Abhi khamosh hain humko bas khamosh rehny do.

Kaisi Guzar Rahi Hai Sabhi Pochtay To Hain
Kaisay Guzarta Hoon Koi Poochta Nahi..

Sambhaal Ke Rehna Aise Logo Se,
Jin Ke Dil Mein Bhi Dimaag Hota Hai.

Akele aaye the akele jayenge..
Phir akela kyun nahi raha jata..

Mujhe zindig ka itna tazurba to nahi !!
Par suna hai saadgi me log jeene nahi dete!

Khusbu Jese Log Hain Hum..!!
Bhikre Bhikre Rehte Hain..!!

kasoor isme tere nahi kismat ka hai..
Sache pyar ki kadar aksar uske chale jane ke bad hoti hai.

Har Baar Ilzaam Hum Par Hi Lagana Achha Nahi..
Wafa Khud Se Hoti Nahi Khafa Hum Se Ho Jate Ho.

Use Hum Chor De Lekin Bus Ik Choti Si Uljhan Hai,
Suna Hai Dil Se dharkan Ki Judai Mout Hoti Hai..

Uski Mohbat ka silsila bi kya ajeeb hai..
Apna bi nhi bnati hai.. Or kisi ka hone bi nhi deti hai.


कैसा सितम है आपका ये, की रोने भी नही देता..
करीब आते नहीं और खुद से जुदा होने भी नहीं देता।

नज़र चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है प्यार करना,
क्या बताएं इस दिलका आलम, नसीब मैं लिखा है इंतज़ार करना..

चलो उसका नही तो खुदा का एहसान लेते हैं…
वो मिन्नत से ना माना तो मन्नत से मांग लेते हैं..

दो रास्ते जींदगी के, दोस्ती और प्यार.!
एक जाम से भरा, दुसरा इल्जाम से..!

ज़िन्दगी ने मर्ज़ का क्या खूब इलाज सुझाया,
वक्त को दवा बताया
ख्वाहिशों से परहेज़ बताया|

मोहब्बत खो गयी मेरी, बेवफ़ाई के दलदल में,
मगर इन पागल आँखो को, आज भी तेरी तलाश रहती है|

थोङा ऐतबार करो मुझ पर
दोस्त हूँ मैं, कोई गैर नही
मुहब्बत हुई है, गुनाह तो नही..

अब जो रूठोगे तोह हार जाउंगी..
मानाने का हुनर भूल चुकी हु|

टूट जायेगी तुम्हारी ज़िद की आदत उस दिन,
जब पता चलेगा की याद करने वाला अब याद बन गया..

“उसे कह दो कि वो किसी और से,मुहब्बत कि ना सोचें,
एक हम ही काफी है,उसे उम्र भर चाहने के लिए..!!”


 जिनका मिलना मुकद्दर मे लिखा नही होता..
उनसे मुहबत कसम से कमाल की होती है ।।

तेरे बाद हमने इस दिलका दरवाज़ा खोला ही नही,
“वरना” बहुत से चाँद आये इस घर को सजाने के लिए..

आज़ाद कर दूंगा तुमको अपनी मुहब्बत की क़ैद से,
करे जो हमसे बेहतर तुम्हारी क़दर पहले वो शख्स तो ढूँढो..

आप जब तक रहेंगे आंखों में नजारा बनकर..
रोज आएंगे मेरी दुनिया में उजाला बनकर..

नहीं अब जख़्म कोई ग़हरा चाहिये..
बस तेरी दुआओं का पहरा चाहिये।

जहर से खतरनाक है यह मोहब्बत,
जरा सा कोई चख ले तो मर मर के जीता है!

सारा झगड़ा ही ख्वाहिशो का है,
ना गम चाहिए ना कम चाहिए..!!!

गुमनामी का अँधेरा कुछ इस तरह छा गया है..
की दास्ताँ बन के जीना भी हमे रास आ गया है।

जिसकी वजह से मेंने छोड़ी अपनी साँस..
आज वो ही आके पूछती हे किसकी हे ये लाश।।

मोहब्बत नही थी तो एक बार समझाया तो होता..
बेचारा दिल तुम्हारी खामोशी को इश्क़ समझ बैठा|


तेरी मुहब्बत पर मेरा हक तो नही पर दिल चाहता है,
आखरी सास तक तेरा इंतजार करू!

काश तू बस इतनी सी मोहब्बत निभा दे..
जब मैं रूठूँ तो तू मुझे मना ले…!

बस रिश्ता ही तो टूटा है,
मोहब्बत तो आज भी हमे उनसे है….

रंज़िश ही सही दिल ही दुखाने के लिए आ..
आ फिरसे मुझे छोड़के जानेके लिए आ|

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो..
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है|

कोई ठुकरा दे तो हँसकर जी लेना,
क्यूँकि मोहब्बत की दुनिया में ज़बरजस्ती नहीं होती!

दीवानगी मे कुछ एसा कर जाएंगे..
महोब्बत की सारी हदे पार कर जाएंगे।

तेरी तो फितरत थी सबसे मोहब्बत करने की,
हम तो बेवजह खुद को खुशनसीब समझने लगे|

बस यही दो मसले, जिंदगीभर ना हल हुए!!!
ना नींद पूरी हुई, ना ख्वाब मुकम्मल हुए!!!

यू तो खुश है, जमाना मेरी शोहरत से..
मगर कुछ लोग हैं, जिनका दम निकलता हैं|


तोड़ कर जोड़ लो चाहे हर चीज़ दुनिया की..
सब की मरम्मत मुमकिन है एतबार के सिवा|

बहके बहके ही, अँदाज-ए-बयां होते है..
आप होते है तो, होश कहाँ होते है|

हँसी यूँ ही नहीं आई है इस ख़ामोश चेहरे पर,
कई ज़ख्मों को सीने में दबाकर रख दिया हमने|

मुझसे कहती है तेरे साथ रहूंगी!
बहुत प्यार करती है मुझसे मेरी उदासी !!

इतना ही गुरुर था तो मुकाबला इश्क का करती ऐ बेवफा..
हुस्न पर क्या ईतराना जिसकी ओकात ही बिस्तर तक हौ..।।

मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नही..
चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए।

सोजा दिल आज धुँध बहुत है….! तेरे शहर में..! अपने दिखते नही
और जो दिखते है ..! वो अपने नही है…!

नाराज क्यों होते हो चले जायेंगे तुम्हारी जिन्दगी से बहुत दूर,
जरा टूटे हुए दिल के टुकङे तो उठा लेने दो!

खामोश बैठे हैं तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नहीं,
और ज़रा सा हंस लें तो लोग मुस्कुराने की वजह पूछ लेते है।

लगता है खुदा मुझे बुलाने वाला है,
रोज़ मेरी झूटी कसमे खा रही है वो|


Ye kaisa silsila hai tere aur mere darmiyaan,
Faasle toh bahot hain magar mohabbat kam nahi hoti.

Ek tujhko hi chaaha tha, zamaane se ladkar…!!
Tumne zamaane se milkar, mujhe hi tanhaa kar diya.

Aie shekh mere peene ka andaz dekh,
Aksar sharab me aansu mila ke peeta hoon.

Kahin fisal na jao zara sambhal ke rehna,
Mausam baarish ka bhi hai aur mohabbat ka bhi.

Mere hi hathon pe likhi hai taqdeer meri,
Aur meri hi taqdeer par mera bus nahi chalta.

Tujhe pa na sake toh bhi saari zindagi tujhe pyar karenge,
Ye zaruri toh nahi jo mil na sake usse chhor diya jaye.

Zindagi mein Yeh Hunar Bhi Aazmaana chahiye,
Apnon se agar ho Jung toh haar Jaana chahiye.

Hum roj udas hote hai or shaam guzar jaati hai,
Ek roj shaam bi udas hogi or hum guzar jayenge.

Uski bewafai pe bhi fida hoti hai jaan apni,
Khuda jane agar us mein wafa hoti to kya hota.

Bas ek tujhe hi yakeen nahi mere jazbaaton par,
Warna kitne hi deewane ban bethe meri mohabbat ki dastan sun kar.


मेरी हर बात को उल्टा वो समझ लेते हैं,
अब के पूछा तो कह दूंगा कि हाल अच्छा है..

खामोशियाँ में शोर को सुना है मैंने,
ये ग़ज़ल गुंगुनायेगी रात के साये में ।

मिला क्या हमें सारी उम्र मोहब्बत करके,
बस एक शायरी का हुनर, एक रातों का जागना..

ना पीछे मुड़ के देखो, ना आवाज़ दो मुझको,
बड़ी मुश्किल से सीखा है मैंने अलविदा कहना..!

कभी टूटा नहीं मेरे दिल से तेरी यादों का रिश्ता..
गुफ़्तगू किसी से भी हो ख़याल तेरा ही रहता है..

ना छेड़ किस्सा वोह उल्फत का बड़ी लम्बी कहानी है
मैं जिन्दगी से नहीं हारा किसी अपने की मेहरबानी है

हर किसी के हाथ मैं बिक जाने को हम तैयार नहीं..
यह मेरा दिल है तेरे शहर का अख़बार नहीं..

आज भी एक सवाल छिपा है.. दिल के किसी कोने मैं..
की क्या कमी रह गईथी तेरा होने में.

मेरी लिखी किताब, मेरे ही हाथो मे देकर वो कहने लगे
इसे पढा करो, मोहब्बत करना सिख जाओगे..!!

इतनी चाहत तो लाखो रुपए पाने की भी नही होती..
जितनी बचपन की तस्वीर देख कर बचपन में जाने की होती हैं


चुपचाप चल रहे थे.. हम अपनी मंजिल की तरफ..
फिर रस्ते में एक ठेका पड़ा.. और हम गुमराह हो गए।

ऐ जीन्दगी जा ढुंड॒ कोई खो गया है मुझ से.
अगर वो ना मिला तो सुन तेरी भी जरुरत नही मुझे.

कुछ दूर हमारे साथ चलो, हम दिल की कहानी कह देंगे,
समझे ना जिसे तुम आखो से, वो बात जुबानी कह देंगे ।

कितनी ही खूबसूरत क्यों न हो तुम..
पर मैं जानता हूँ.. असली निखार मेरी तारीफ से ही आता है..

होने वाले ख़ुद ही अपने हो जाते हैं..
किसी को कहकर, अपना बनाया नही जाता..!!

नक़ाब क्या छुपाएगा शबाब-ए-हुस्न को,
निगाह-ए-इश्क तो पत्थर भी चीर देती है..

ज़िन्दगी जोकर सी निकली
कोई अपना भी नहीं.. कोई पराया भी नहीं

मेरी आँखों में बहने वाला ये आवारा सा आसूँ
पूछ रहा है.. पलकों से तेरी बेवफाई की वजह..

दम तोड़ जाती है हर शिकायत लबों पे आकर,
जब मासूमियत से वो कहती है मैंने क्या किया है

अगर तुम्हें यकीं नहीं, तो कहने को कुछ नहीं मेरे पास,
अगर तुम्हें यकीं है, तो मुझे कुछ कहने की जरूरत नही !


तुम बदलो तो….कहेते हो मज़बूरीयाँ है बहोत,
और हम ज़रा सा बदले तो हम बेवफ़ा हो गए|

सुकून ऐ दिल के लिए कभी हाल तो पूँछ ही लिया करो,
मालूम तो हमें भी है कि हम आपके कुछ नहीं लगते..

यूँ बिगड़ी बहकी बातों का कोई शौक़ नही है मुझको,
वोपुरानी शराब के जैसी है,असर सर से उतरता ही नही..

बेवफा कहने से पहले मेरी रग रग का खून निचोड़ लेना।
कतरे कतरे से वफ़ा ना मिले तो बेशक मुझे छोड़ देना।

पीते थे शराब हम, उसने छुड़ाई अपनी कसम देकर,
महफ़िल में गए थे हम, यारों ने पिलाई उसकी कसम देकर।

तेरी तलाश में निकलू भी तो क्या फायदा..
तुम बदल गए हो.. खो गए होते तो और बात थी|

तज़ुर्बा है मेरा मिट्टी की पकड़ मजबुत होती है,
संगमरमर पर तो हमने पाँव फिसलते देखे हैं..

उस शख्स का गम भी कोई सोचे..
जिसे रोता हुआ ना देखा हो किसी ने..

जाने क्या मासूमियत है तेरे चेहरे में,
तेरे सामने आने से ज्यादा तुझे छुपके देखना अच्छा लगता है|

खुद पर भरोसे का हुनर सीख ले..
लोग जितने भी सच्चे हो साथ छोड़ ही जाते हैं|


तेरा प्यार भी एक हजार की नोट जैसा है,
डर लगता है कहीं नकली तो नहीं|

आज इतना जहर पिला दो कि सांस तक रुक जाए मेरी,
सुना है कि सांस रुक जाए तो रूठे हुये भी देखने आते है…!

क्यूँ शर्मिंदा करते हो रोज, हाल हमारा पूँछ कर ,
हाल हमारा वही है जो तुमने बना रखा हैं…

उम्र गुजार दी मैने गमो के कारोबार मे ।
खुदा जाने सुकून बिकता कहा है?

सुकून ऐ दिल के लिए कभी हाल तो पूँछ ही लिया करो,
मालूम तो हमें भी है कि हम आपके कुछ नहीं लगते…!

तुम्हारे खयालो में चलते चलते कही फिसल ना जाऊ मैं,
अपनी यादों को रोक, की मेरे शहर में बारिश का मौसम है..

कुछ रीश्ते ‘रब’ बनाता हे कुछ रीश्ते ‘लोग’ बनाते हे
पर कुछ् लोग बीना कीसी रीश्ते के रीश्ते नीभाते हे, शायद वही ‘दोस्त’ कहेलाते हे|

मुहब्बत में यही खौफ क्यों हरदम रहता है…
कही मेरे सिवा किसी और से तो मुहब्बत नहीं उसे…

खुदा का शुक्र है की ख्वाब बना दिये,
वरना तुम्हे देखने की तो हसरत ही रह जाती।

मुझे रुला कर सोना तो तेरी आदत बन गई है,
जिस दिन मेरी आँख ना खुली तुझे निंद से नफरत हो जायेगी|


सुना है आज उस की आँखों मे आसु आ गये..!!
वो बच्चो को सिखा रही थी की मोहब्बत ऐसे लिखते है..!!

घायल किया जब अपनो ने, तो गैरो से क्या गिला करना,
उठाये है खंजर जब अपनो ने, तो जिंदगी की तमन्ना क्या करना|

न रूठ जाओ तुम मेरी वफाओं से,
मै खुद मना लूंगा तुम्हे दुआओं से।

हम भी बडे रहीश थे दिल कि दौलत लूटा बैठे,
किस्मत एेसी पलटी ईश्क के धधे मे आ बैठे|

नाकाम थीं मेरी सब कोशिशें उस को मनाने की,
पता नहीं कहां से सीखी जालिम ने अदाएं रूठ जाने की।

हौसला रखो उसे मनाने का,
वो रूठ जाता है इसी बहाने से|

बड़ी मुश्किल से सुलाया है ख़ुद को मैंने..
अपनी आँखों को तेरे ख़्वाब क़ा लालच देकर|

उसने पुछा जिंदगी किसने बरबाद की,
हमने ऊँगली उठाई और अपने ही दिल पर रख ली |

ऐ शेख़ मेरे पीने का अंदाज़ देख,
अक्सर शराब में आंसू मिला के पीता हूँ|

कहीं फिसल ना जाओ ज़रा संभल के रहना,
मौसम बारिश का भी है और मुहब्बत का भी…



मंजर भी बेनूर थे और फिजायें भी बेरंग थी…
बस तुम याद आए और मौसम सुहाना हो गया…

फितरत, सोच और हालात में फर्क है…
वरना ,इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नही होता..

गिरा दे जितना पानी है तेरे पास ऐ बादल.
ये प्यास किसी के मिलने से बुझेगी तेरे बरसने से नही..

तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में,
बस कोई अपना नजऱ अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता

तना पानी है तेरे पास ऐ बादल. .
ये प्यास किसी के मिलने से बुझेगी तेरे बरसने से नही..

मंजर भी बेनूर थे और फिजायें भी बेरंग थी…
बस तुम याद आए और मौसम सुहाना हो गया….

आजकल के हर आशिक की अब तो यही कहानी है..
मजनू चाहता है लैला को, लैला किसी और की दीवानी है !!!

मोहब्बत वक़्त के बे-रहम तूफान से नही डरती ,
उससे कहना, बिछड़ने से मोहब्बत तो नही मरती .

जिंदगी के रूप में दो घूंट मिले,
इक तेरे इश्क का पी चुके हैं..दुसरा तेरी जुदाई का पी रहे हैं !!!!

मुस्कुराने की आदत भी कितनी महँगी पड़ी हमे;
छोड़ गया वो ये सोच कर की हम जुदाई मे भी खुश हैं..

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